डेली करेंट अफेयर्स 2026 हिंदी | मुद्रास्फीति, GDP, मौद्रिक नीति एवं राजकोषीय नीति | UPSC करेंट अफेयर्स | पृष्ठ 2

 

डेली करेंट अफेयर्स 2026

मुद्रास्फीति, सकल घरेलू उत्पाद (GDP), मौद्रिक नीति एवं राजकोषीय नीति

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), राज्य लोक सेवा आयोग, बैंकिंग, SSC, RBI ग्रेड-B, NABARD तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रीमियम अध्ययन सामग्री।

मुद्रास्फीति एवं मौद्रिक नीति

आज का विषय क्यों महत्वपूर्ण है?

मुद्रास्फीति, GDP, मौद्रिक नीति तथा राजकोषीय नीति किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता के प्रमुख आधार हैं। इनका प्रभाव वस्तुओं की कीमतों, रोजगार, निवेश, बचत, उत्पादन तथा आर्थिक विकास पर पड़ता है। UPSC सहित अधिकांश प्रतियोगी परीक्षाओं में इन विषयों से प्रतिवर्ष प्रश्न पूछे जाते हैं।

आज के अध्ययन के उद्देश्य

  • मुद्रास्फीति की अवधारणा एवं उसके प्रकारों को समझना।
  • GDP तथा आर्थिक विकास के संबंध का अध्ययन करना।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति की भूमिका को समझना।
  • राजकोषीय नीति एवं सरकार की वित्तीय रणनीतियों का अध्ययन करना।
  • वर्तमान आर्थिक घटनाओं को UPSC परीक्षा के दृष्टिकोण से समझना।

करेंट अफेयर्स परिप्रेक्ष्य

भारत की अर्थव्यवस्था में मूल्य स्थिरता बनाए रखना, विकास दर को प्रोत्साहित करना तथा वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा रेपो दर, नकद आरक्षित अनुपात (CRR) तथा अन्य मौद्रिक उपकरणों का उपयोग किया जाता है, जबकि सरकार बजट, कर नीति एवं सार्वजनिक व्यय के माध्यम से राजकोषीय नीति लागू करती है।

परीक्षा में महत्व

मुद्रास्फीति, GDP, मौद्रिक नीति, राजकोषीय नीति, रेपो दर, रिवर्स रेपो दर, राजकोषीय घाटा एवं आर्थिक स्थिरता से संबंधित प्रश्न UPSC सामान्य अध्ययन (GS Paper III), बैंकिंग, RBI ग्रेड-B, NABARD तथा SSC परीक्षाओं में नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

मुख्य अवधारणाएँ

  • मुद्रास्फीति (Inflation)
  • सकल घरेलू उत्पाद (GDP)
  • मौद्रिक नीति (Monetary Policy)
  • राजकोषीय नीति (Fiscal Policy)
  • रेपो दर एवं रिवर्स रेपो दर
  • राजकोषीय घाटा
  • आर्थिक स्थिरता
  • मूल्य नियंत्रण

त्वरित पुनरावृत्ति

  • मुद्रास्फीति का अर्थ वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों में लगातार वृद्धि है।
  • GDP किसी देश की आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख संकेतक है।
  • मौद्रिक नीति का संचालन भारतीय रिज़र्व बैंक करता है।
  • राजकोषीय नीति का निर्माण एवं क्रियान्वयन केंद्र सरकार करती है।
  • दोनों नीतियाँ आर्थिक स्थिरता एवं विकास के लिए आवश्यक हैं।

UPSC स्मार्ट टिप

हमेशा इस क्रम को याद रखें— मुद्रास्फीति → RBI की मौद्रिक नीति → सरकारी राजकोषीय नीति → आर्थिक स्थिरता → आर्थिक विकास यह क्रम UPSC प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा दोनों में उत्तर लिखने तथा अवधारणाओं को समझने में अत्यंत उपयोगी है।


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विशेष विषय

मुद्रास्फीति (Inflation) – प्रकार, कारण एवं प्रभाव

मुद्रास्फीति

मुद्रास्फीति (Inflation) वह स्थिति है जिसमें समय के साथ वस्तुओं एवं सेवाओं की सामान्य कीमतों में लगातार वृद्धि होती है। जब कीमतें बढ़ती हैं तो समान धनराशि से पहले की तुलना में कम वस्तुएँ और सेवाएँ खरीदी जा सकती हैं। इसलिए मुद्रास्फीति नागरिकों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) को प्रभावित करती है।

मुद्रास्फीति के प्रमुख प्रकार

प्रकार संक्षिप्त विवरण
मांग-जनित मुद्रास्फीति (Demand-Pull Inflation) जब मांग, आपूर्ति से अधिक हो जाती है।
लागत-जनित मुद्रास्फीति (Cost-Push Inflation) जब उत्पादन लागत बढ़ने से कीमतें बढ़ती हैं।
संरचनात्मक मुद्रास्फीति अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक कमियों के कारण उत्पन्न होती है।

मुद्रास्फीति के प्रमुख कारण

  • मांग में तीव्र वृद्धि।
  • उत्पादन लागत में वृद्धि।
  • कच्चे माल एवं ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी।
  • आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान।
  • प्राकृतिक आपदाएँ एवं वैश्विक संकट।
  • अत्यधिक मुद्रा आपूर्ति।

मुद्रास्फीति के प्रभाव

  • सामान्य नागरिकों की क्रय शक्ति में कमी।
  • बचत का वास्तविक मूल्य घटता है।
  • उत्पादन लागत बढ़ती है।
  • गरीब एवं मध्यम वर्ग पर अधिक प्रभाव पड़ता है।
  • यदि नियंत्रित रहे तो निवेश एवं उत्पादन को प्रोत्साहन भी मिल सकता है।

समसामयिक महत्व

खाद्य पदार्थों, ऊर्जा एवं ईंधन की कीमतों में परिवर्तन का सीधा प्रभाव मुद्रास्फीति पर पड़ता है। इसलिए भारतीय रिज़र्व बैंक तथा सरकार समय-समय पर विभिन्न नीतिगत उपायों के माध्यम से मूल्य स्थिरता बनाए रखने का प्रयास करते हैं।

UPSC स्मार्ट टिप

मुद्रास्फीति से जुड़े उत्तर लिखते समय निम्न क्रम अपनाएँ— कारण → प्रभाव → RBI की भूमिका → सरकारी उपाय → निष्कर्ष यह संरचना उत्तर को अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावशाली बनाती है।

मुख्य तथ्य

  • मुद्रास्फीति कीमतों में लगातार वृद्धि को दर्शाती है।
  • यह नागरिकों की क्रय शक्ति को प्रभावित करती है।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक मौद्रिक नीति के माध्यम से मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने का प्रयास करता है।
  • संतुलित मुद्रास्फीति आर्थिक विकास के लिए उपयोगी मानी जाती है।
  • अत्यधिक मुद्रास्फीति अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक हो सकती है।

विशेष विषय – भाग 2

सकल घरेलू उत्पाद (GDP), मौद्रिक नीति एवं राजकोषीय नीति

GDP, मौद्रिक नीति एवं राजकोषीय नीति

किसी भी देश की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP), मौद्रिक नीति (Monetary Policy) तथा राजकोषीय नीति (Fiscal Policy) अत्यंत महत्वपूर्ण संकेतक हैं। ये तीनों मिलकर आर्थिक विकास, मूल्य स्थिरता, निवेश, रोजगार तथा समग्र आर्थिक संतुलन को प्रभावित करते हैं।

सकल घरेलू उत्पाद (GDP)

सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product) किसी देश की सीमाओं के भीतर एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को दर्शाता है। GDP किसी देश की आर्थिक प्रगति का प्रमुख संकेतक माना जाता है।

  • आर्थिक विकास का प्रमुख मापदंड।
  • उत्पादन एवं आय का संकेतक।
  • नीतिगत निर्णयों का आधार।
  • अंतरराष्ट्रीय तुलना में उपयोगी।

मौद्रिक नीति (Monetary Policy)

मौद्रिक नीति का निर्माण एवं संचालन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना, मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना तथा आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना है।

RBI के प्रमुख मौद्रिक उपकरण

  • रेपो दर (Repo Rate)
  • रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo Rate)
  • नकद आरक्षित अनुपात (CRR)
  • वैधानिक तरलता अनुपात (SLR)
  • खुले बाजार की क्रियाएँ (Open Market Operations)

राजकोषीय नीति (Fiscal Policy)

राजकोषीय नीति का निर्माण केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है। इसमें कराधान (Taxation), सरकारी व्यय (Public Expenditure), बजट तथा सार्वजनिक ऋण के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित किया जाता है।

राजकोषीय नीति के उद्देश्य

  • आर्थिक विकास को गति देना।
  • रोजगार के अवसर बढ़ाना।
  • आय एवं संपत्ति की असमानता कम करना।
  • बुनियादी ढाँचे का विकास।
  • सामाजिक कल्याण योजनाओं को समर्थन देना।

मौद्रिक नीति एवं राजकोषीय नीति में अंतर

मौद्रिक नीति राजकोषीय नीति
भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा संचालित केंद्र सरकार द्वारा संचालित
मुद्रा एवं ब्याज दरों पर नियंत्रण कर एवं सरकारी व्यय का प्रबंधन
मुद्रास्फीति नियंत्रण आर्थिक विकास एवं रोजगार

वर्तमान परिप्रेक्ष्य

वर्तमान वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में मुद्रास्फीति नियंत्रण, सतत आर्थिक विकास, निवेश को बढ़ावा तथा रोजगार सृजन के लिए मौद्रिक एवं राजकोषीय नीतियों के बीच प्रभावी समन्वय अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

UPSC स्मार्ट टिप

इस क्रम को सदैव याद रखें— GDP → मुद्रास्फीति → RBI → मौद्रिक नीति → सरकार → राजकोषीय नीति → आर्थिक विकास यह क्रम UPSC मुख्य परीक्षा एवं प्रारंभिक परीक्षा दोनों में उत्तर लिखने के लिए अत्यंत उपयोगी है।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • GDP आर्थिक प्रदर्शन का प्रमुख संकेतक है।
  • RBI मौद्रिक नीति का संचालन करता है।
  • सरकार राजकोषीय नीति का निर्माण करती है।
  • रेपो दर एवं CRR मौद्रिक नीति के महत्वपूर्ण उपकरण हैं।
  • कर एवं सरकारी व्यय राजकोषीय नीति के प्रमुख साधन हैं।
  • दोनों नीतियों का उद्देश्य संतुलित एवं समावेशी आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है।

भाग 3A

UPSC मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

UPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न - मुद्रास्फीति एवं GDP

मुद्रास्फीति, सकल घरेलू उत्पाद (GDP), मौद्रिक नीति एवं राजकोषीय नीति भारतीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण विषय हैं। UPSC मुख्य परीक्षा में इन विषयों पर विश्लेषणात्मक एवं समसामयिक प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

UPSC मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

  1. मुद्रास्फीति (Inflation) से आप क्या समझते हैं? इसके प्रमुख कारणों एवं भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों की विवेचना कीजिए।

    (150 शब्द | 10 अंक)

  2. सकल घरेलू उत्पाद (GDP) क्या है? आर्थिक विकास के मापन में इसकी उपयोगिता एवं सीमाओं का विश्लेषण कीजिए।

    (150 शब्द | 10 अंक)

  3. भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति मूल्य स्थिरता एवं आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने में किस प्रकार सहायक होती है? स्पष्ट कीजिए।

    (250 शब्द | 15 अंक)

  4. मौद्रिक नीति एवं राजकोषीय नीति में अंतर स्पष्ट करते हुए बताइए कि आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में दोनों के बीच समन्वय क्यों आवश्यक है?

    (250 शब्द | 15 अंक)

  5. भारत में बढ़ती मुद्रास्फीति की चुनौती से निपटने के लिए सरकार एवं भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा उठाए जाने वाले उपायों का मूल्यांकन कीजिए।

    (250 शब्द | 15 अंक)

उत्तर लेखन दिशा-निर्देश

  • उत्तर की शुरुआत स्पष्ट परिचय से करें।
  • आर्थिक शब्दावली का सही प्रयोग करें।
  • तालिका, फ्लोचार्ट एवं उपशीर्षकों का उपयोग करें।
  • समसामयिक आर्थिक घटनाओं एवं सरकारी नीतियों का उल्लेख करें।
  • चुनौतियों के साथ व्यावहारिक समाधान अवश्य लिखें।
  • उत्तर का समापन सकारात्मक एवं संतुलित निष्कर्ष से करें।

UPSC उत्तर लेखन रणनीति

आर्थिक विषयों पर उत्तर लिखते समय निम्नलिखित क्रम अपनाएँ— परिचय → अवधारणा → कारण → प्रभाव → चुनौतियाँ → सरकारी एवं RBI के उपाय → निष्कर्ष जहाँ संभव हो वहाँ सरल फ्लोचार्ट का प्रयोग करें, जैसे— मुद्रास्फीति → क्रय शक्ति में कमी → उपभोग पर प्रभाव → आर्थिक गतिविधियाँ → नीति सुधार या RBI → मौद्रिक नीति → मूल्य स्थिरता → निवेश → आर्थिक विकास इस प्रकार की प्रस्तुति उत्तर को अधिक प्रभावशाली बनाती है तथा UPSC मुख्य परीक्षा में बेहतर अंक प्राप्त करने में सहायता करती है।

भाग 3B

UPSC मुख्य परीक्षा – मॉडल उत्तर

UPSC मुख्य परीक्षा मॉडल उत्तर

प्रश्न

"मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति तथा सरकार की राजकोषीय नीति की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।"

(250 शब्द | 15 अंक)

मॉडल उत्तर

प्रस्तावना

मुद्रास्फीति किसी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं एवं सेवाओं की सामान्य कीमतों में निरंतर वृद्धि को दर्शाती है। अत्यधिक मुद्रास्फीति नागरिकों की क्रय शक्ति को कम करती है तथा आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करती है। इसलिए इसे नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) तथा केंद्र सरकार समन्वित रूप से कार्य करते हैं।

मौद्रिक नीति की भूमिका

  • रेपो दर एवं रिवर्स रेपो दर में परिवर्तन द्वारा मुद्रा प्रवाह को नियंत्रित करना।
  • नकद आरक्षित अनुपात (CRR) एवं वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में तरलता का प्रबंधन।
  • खुले बाजार की क्रियाओं (Open Market Operations) द्वारा मुद्रा आपूर्ति को संतुलित करना।
  • मूल्य स्थिरता एवं वित्तीय स्थिरता बनाए रखना।

राजकोषीय नीति की भूमिका

  • सरकारी व्यय एवं कर नीति के माध्यम से मांग का प्रबंधन।
  • आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बढ़ाना।
  • उत्पादन एवं आपूर्ति को प्रोत्साहन देना।
  • गरीब एवं कमजोर वर्गों को लक्षित सहायता प्रदान करना।
  • बुनियादी ढाँचे एवं कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाना।

मुख्य चुनौतियाँ

  • वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव।
  • आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान।
  • खाद्य मुद्रास्फीति।
  • अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अनिश्चितता।
  • बढ़ती उपभोक्ता मांग एवं उत्पादन लागत।

आगे की राह

  • मौद्रिक एवं राजकोषीय नीतियों के बीच बेहतर समन्वय।
  • कृषि एवं विनिर्माण क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाना।
  • लॉजिस्टिक्स एवं आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना।
  • डिजिटल भुगतान एवं वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना।
  • मूल्य निगरानी एवं समयबद्ध नीति हस्तक्षेप सुनिश्चित करना।

निष्कर्ष

स्थिर एवं संतुलित अर्थव्यवस्था के लिए मुद्रास्फीति पर नियंत्रण आवश्यक है। भारतीय रिज़र्व बैंक की प्रभावी मौद्रिक नीति तथा सरकार की संतुलित राजकोषीय नीति मिलकर मूल्य स्थिरता, निवेश, रोजगार तथा सतत आर्थिक विकास को सुनिश्चित करती हैं। भविष्य में समन्वित नीतिगत प्रयास भारत की आर्थिक प्रगति को और अधिक सुदृढ़ बनाएंगे।

UPSC उत्तर लेखन सुझाव

  • परिचय में मुद्रास्फीति की स्पष्ट परिभाषा दें।
  • RBI एवं सरकार की भूमिकाओं को अलग-अलग शीर्षकों में लिखें।
  • रेपो दर, CRR, SLR तथा कर नीति जैसे प्रमुख शब्दों का उपयोग करें।
  • समसामयिक आर्थिक उदाहरणों का उल्लेख करें।
  • उत्तर का समापन संतुलित एवं समाधान-आधारित निष्कर्ष से करें।

परीक्षा विशेष तथ्य

UPSC में इस विषय से जुड़े उत्तर लिखते समय मुद्रास्फीति, GDP, रेपो दर, रिवर्स रेपो दर, CRR, SLR, मौद्रिक नीति, राजकोषीय नीति, मूल्य स्थिरता, आर्थिक विकास, वित्तीय समावेशन तथा RBI जैसे प्रमुख शब्दों का उचित प्रयोग उत्तर को अधिक प्रभावशाली बनाता है।

भाग 4A

UPSC प्रारंभिक परीक्षा – वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)

UPSC प्रारंभिक परीक्षा MCQs

नीचे दिए गए बहुविकल्पीय प्रश्न UPSC प्रारंभिक परीक्षा के नवीनतम पैटर्न के अनुसार तैयार किए गए हैं। इनका उद्देश्य मुद्रास्फीति, GDP, मौद्रिक नीति एवं राजकोषीय नीति की अवधारणाओं को मजबूत करना है।

अभ्यास प्रश्न

  1. भारत में मौद्रिक नीति (Monetary Policy) का संचालन कौन करता है?

    A. वित्त मंत्रालय
    B. नीति आयोग
    C. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
    D. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI)

  2. रेपो दर (Repo Rate) क्या है?

    A. सरकार द्वारा बैंकों को दिया जाने वाला अनुदान
    B. वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालीन ऋण देता है
    C. बचत खाते की ब्याज दर
    D. विदेशी मुद्रा विनिमय दर

  3. राजकोषीय नीति (Fiscal Policy) का प्रमुख साधन कौन-सा है?

    A. रेपो दर
    B. CRR
    C. कराधान एवं सरकारी व्यय
    D. बैंक दर

  4. निम्नलिखित में से GDP का सही अर्थ क्या है?

    A. कुल सरकारी व्यय
    B. देश में एक निश्चित अवधि के दौरान उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल मूल्य
    C. केवल औद्योगिक उत्पादन का मूल्य
    D. केवल कृषि उत्पादन का मूल्य

  5. मुद्रास्फीति बढ़ने पर सामान्यतः भारतीय रिज़र्व बैंक क्या कर सकता है?

    A. रेपो दर कम कर सकता है
    B. रेपो दर बढ़ा सकता है
    C. आयकर समाप्त कर सकता है
    D. निर्यात शुल्क समाप्त कर सकता है

उत्तर कुंजी

  • 1 — C
  • 2 — B
  • 3 — C
  • 4 — B
  • 5 — B

परीक्षा फोकस

UPSC प्रारंभिक परीक्षा में मुद्रास्फीति, GDP, रेपो दर, रिवर्स रेपो दर, CRR, SLR, मौद्रिक नीति, राजकोषीय नीति तथा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से संबंधित अवधारणात्मक प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

त्वरित तैयारी सुझाव

प्रारंभिक परीक्षा के लिए केवल परिभाषाएँ याद न करें। प्रत्येक आर्थिक अवधारणा को उसके उद्देश्य, प्रभाव तथा वर्तमान आर्थिक घटनाओं के साथ जोड़कर समझें। इससे कठिन एवं विश्लेषणात्मक प्रश्नों का उत्तर देना अधिक आसान होगा।

भाग 4B

UPSC प्रारंभिक परीक्षा – उत्तरों की विस्तृत व्याख्या

मुद्रास्फीति एवं मौद्रिक नीति पुनरावृत्ति

UPSC प्रारंभिक परीक्षा में सफलता के लिए केवल सही उत्तर याद रखना पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक उत्तर के पीछे की अवधारणा को समझना अधिक महत्वपूर्ण है। इससे नए एवं विश्लेषणात्मक प्रश्नों का उत्तर देना आसान हो जाता है।

उत्तरों की विस्तृत व्याख्या

1. सही उत्तर: (C) भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
भारत में मौद्रिक नीति का निर्माण एवं संचालन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) करता है। इसका उद्देश्य मूल्य स्थिरता बनाए रखना तथा आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना है।

2. सही उत्तर: (B) वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालीन ऋण देता है
रेपो दर वह ब्याज दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालीन ऋण उपलब्ध कराता है। मुद्रास्फीति बढ़ने पर सामान्यतः रेपो दर बढ़ाई जाती है ताकि बाजार में मुद्रा प्रवाह नियंत्रित किया जा सके।

3. सही उत्तर: (C) कराधान एवं सरकारी व्यय
राजकोषीय नीति का संचालन सरकार करती है। इसमें कर संग्रह, सरकारी व्यय, सार्वजनिक निवेश तथा बजट के माध्यम से अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया जाता है।

4. सही उत्तर: (B) देश में एक निश्चित अवधि के दौरान उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल मूल्य
GDP किसी देश के आर्थिक प्रदर्शन का प्रमुख संकेतक है और यह निर्धारित अवधि में उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मूल्य को दर्शाता है।

5. सही उत्तर: (B) रेपो दर बढ़ा सकता है
जब मुद्रास्फीति बढ़ती है तो RBI सामान्यतः रेपो दर बढ़ाकर ऋण को महँगा बनाता है। इससे बाजार में मुद्रा की उपलब्धता कम होती है तथा कीमतों पर नियंत्रण रखने में सहायता मिलती है।

त्वरित पुनरावृत्ति

  • RBI भारत की मौद्रिक नीति संचालित करता है।
  • सरकार राजकोषीय नीति का निर्माण करती है।
  • रेपो दर बढ़ने से ऋण महँगा होता है।
  • GDP आर्थिक प्रदर्शन का प्रमुख संकेतक है।
  • मुद्रास्फीति से क्रय शक्ति प्रभावित होती है।
  • मूल्य स्थिरता आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है।

UPSC स्मार्ट रिवीजन बॉक्स

  • मुद्रास्फीति → कीमतों में वृद्धि
  • GDP → आर्थिक प्रदर्शन का माप
  • RBI → मौद्रिक नीति
  • सरकार → राजकोषीय नीति
  • रेपो दर → मुद्रा प्रवाह नियंत्रण
  • CRR एवं SLR → बैंकिंग प्रणाली की तरलता नियंत्रण

परीक्षा विशेष सुझाव

UPSC प्रारंभिक परीक्षा में आर्थिक विषयों की तैयारी करते समय प्रत्येक अवधारणा को वर्तमान आर्थिक घटनाओं, RBI की नीतियों तथा केंद्रीय बजट से जोड़कर पढ़ें। इससे तथ्यात्मक तथा विश्लेषणात्मक दोनों प्रकार के प्रश्नों को हल करने की क्षमता विकसित होती है।

अगला अध्याय

पृष्ठ 3 में हम केंद्रीय बजट, आर्थिक सर्वेक्षण, कराधान (Taxation) तथा राजकोषीय घाटा का विस्तृत अध्ययन करेंगे। इसमें डेली करेंट अफेयर्स, विशेष विषय, UPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न एवं मॉडल उत्तर तथा प्रारंभिक परीक्षा MCQs शामिल होंगे।


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