शक्तिमाता लर्निंग UPSC मुख्य परीक्षा 2026
प्रीमियम बहुभाषी शैक्षिक इकोसिस्टम – पेज 4
पर्यावरण संरक्षण • जलवायु परिवर्तन • आपदा प्रबंधन
प्रश्न 1: जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारणों तथा इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
परिचय
जलवायु परिवर्तन वर्तमान समय की सबसे गंभीर वैश्विक चुनौतियों में से एक है। यह प्राकृतिक तथा मानवीय गतिविधियों के कारण उत्पन्न हो रहा है।
मुख्य भाग
- ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ता उत्सर्जन।
- वनों की कटाई और भूमि क्षरण।
- औद्योगिकीकरण एवं जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग।
- कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव।
- जल संकट, स्वास्थ्य समस्याएँ और आर्थिक क्षति।
निष्कर्ष
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कम करने हेतु वैश्विक सहयोग, हरित प्रौद्योगिकी और सतत विकास रणनीतियाँ आवश्यक हैं।
प्रश्न 2: सतत विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण क्यों आवश्यक है? स्पष्ट कीजिए।
परिचय
पर्यावरण और विकास परस्पर जुड़े हुए हैं। पर्यावरणीय संतुलन के बिना दीर्घकालिक विकास संभव नहीं है।
मुख्य भाग
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण।
- जैव विविधता की सुरक्षा।
- स्वच्छ वायु और जल की उपलब्धता।
- भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों का संरक्षण।
- सतत आर्थिक विकास को प्रोत्साहन।
निष्कर्ष
पर्यावरण संरक्षण सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति का आधार है।
प्रश्न 3: भारत में आपदा प्रबंधन की चुनौतियों और समाधान पर चर्चा कीजिए।
मुख्य भाग
- बाढ़, सूखा, चक्रवात और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएँ।
- शहरीकरण और अव्यवस्थित विकास से बढ़ता जोखिम।
- आपदा पूर्व तैयारी की आवश्यकता।
- तकनीक आधारित चेतावनी प्रणालियों का विस्तार।
- सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता कार्यक्रम।
निष्कर्ष
प्रभावी आपदा प्रबंधन मानव जीवन, संपत्ति और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
प्रश्न 4: जलवायु अनुकूलन और जलवायु शमन में अंतर स्पष्ट कीजिए।
मुख्य भाग
- जलवायु शमन (Mitigation): उत्सर्जन कम करना तथा जलवायु परिवर्तन के कारणों को नियंत्रित करना।
- जलवायु अनुकूलन (Adaptation): जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अनुसार स्वयं को तैयार करना।
- नवीकरणीय ऊर्जा शमन का उदाहरण है।
- जल संरक्षण और जलवायु-लचीली कृषि अनुकूलन के उदाहरण हैं।
निष्कर्ष
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए शमन और अनुकूलन दोनों रणनीतियों का संतुलित उपयोग आवश्यक है।
मूल्य संवर्धन (Value Addition)
- सतत विकास – वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं का संतुलन।
- जलवायु न्याय – समान और न्यायपूर्ण पर्यावरणीय उत्तरदायित्व।
- आपदा लचीलापन – जोखिमों का प्रभावी प्रबंधन।
- हरित अर्थव्यवस्था – पर्यावरण और विकास का समन्वय।
- जैव विविधता – पारिस्थितिक संतुलन की आधारशिला।
सीखने योग्य गुण (Qualities)
- पर्यावरणीय जागरूकता
- उत्तरदायित्व
- सतत सोच
- समस्या समाधान क्षमता
- सामुदायिक नेतृत्व
- आपदा तैयारी
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण
- भविष्य उन्मुख योजना
आज का UPSC विचार
"प्रकृति की रक्षा केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि मानवता के भविष्य की रक्षा है।"
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