शक्तिमाता लर्निंग – डेली करंट अफेयर्स 2026
पेज 5 – भाग 1
तिथि: 2026
भाग 1 – डेली करंट अफेयर्स
1. सहकारी संघवाद एवं राष्ट्रीय विकास
भारत में सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) केंद्र एवं राज्यों के बीच समन्वय को सुदृढ़ बनाता है। स्वास्थ्य, शिक्षा, अवसंरचना, कृषि, आपदा प्रबंधन तथा सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में संयुक्त प्रयास समावेशी एवं संतुलित विकास को गति प्रदान करते हैं।
• सहकारी संघवाद
• केंद्र–राज्य संबंध
• सुशासन
2. राजकोषीय संघवाद एवं वित्तीय संतुलन
राजकोषीय संघवाद (Fiscal Federalism) केंद्र एवं राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के न्यायसंगत वितरण को सुनिश्चित करता है। वित्त आयोग की सिफारिशें, करों का बंटवारा तथा अनुदान राज्यों के संतुलित आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
• राजकोषीय संघवाद
• वित्त आयोग
• करों का वितरण
3. GST परिषद एवं सहकारी शासन
GST परिषद केंद्र एवं राज्यों के बीच सहमति आधारित निर्णय लेने का महत्वपूर्ण संवैधानिक मंच है। यह एक समान अप्रत्यक्ष कर प्रणाली, आर्थिक एकीकरण तथा सहयोगात्मक नीति निर्माण को बढ़ावा देती है।
• GST परिषद
• अनुच्छेद 279A
• सहकारी शासन
4. अंतर्राज्यीय समन्वय एवं नीति निर्माण
जल संसाधन, परिवहन, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण तथा क्षेत्रीय विकास जैसे विषयों पर राज्यों के बीच समन्वय भारतीय संघीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी एवं उत्तरदायी बनाता है।
• अंतर्राज्यीय परिषद
• अनुच्छेद 263
• नीति समन्वय
5. संघीय शासन की समकालीन चुनौतियाँ
क्षेत्रीय असमानता, जलवायु परिवर्तन, वित्तीय संसाधनों का वितरण, डिजिटल शासन, शहरीकरण तथा सतत विकास जैसी चुनौतियाँ केंद्र एवं राज्यों के बीच निरंतर सहयोग और प्रभावी नीति समन्वय की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
• संघीय शासन
• जलवायु शासन
• सतत विकास
त्वरित पुनरावृत्ति
- सहकारी संघवाद केंद्र एवं राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करता है।
- राजकोषीय संघवाद संतुलित आर्थिक विकास का आधार है।
- GST परिषद सहयोगात्मक निर्णय प्रक्रिया को प्रोत्साहित करती है।
- अंतर्राज्यीय समन्वय प्रभावी शासन एवं राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करता है।
- मजबूत संघीय संस्थाएँ समावेशी एवं सतत विकास को गति देती हैं।
आज की प्रेरणा
"सहयोग से समृद्धि आती है।
संविधान से एकता मजबूत होती है।
ज्ञान से नेतृत्व विकसित होता है।
मिलकर हम सशक्त भारत का निर्माण करते हैं।"
भाग 2 – विशेष विषय
भारतीय संघीय व्यवस्था – संवैधानिक विश्लेषण
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार भारत "राज्यों का संघ (Union of States)" है। भारतीय संघीय व्यवस्था संघीय एवं एकात्मक दोनों विशेषताओं का समन्वय है। संविधान केंद्र एवं राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन करता है, साथ ही राष्ट्रीय एकता, अखंडता एवं प्रभावी शासन सुनिश्चित करने के लिए एक सशक्त केंद्र की व्यवस्था भी प्रदान करता है।
संवैधानिक ढाँचा
| संवैधानिक प्रावधान | विषय |
|---|---|
| अनुच्छेद 1–4 | संघ एवं उसका राज्यक्षेत्र |
| अनुच्छेद 245–255 | विधायी संबंध |
| अनुच्छेद 256–263 | प्रशासनिक संबंध |
| अनुच्छेद 263 | अंतर्राज्यीय परिषद |
| अनुच्छेद 279A | GST परिषद |
| अनुच्छेद 280 | वित्त आयोग |
विधायी शक्तियों का वितरण
सातवीं अनुसूची के अंतर्गत विधायी शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों में किया गया है।
- संघ सूची (Union List): रक्षा, विदेश नीति, मुद्रा, परमाणु ऊर्जा आदि राष्ट्रीय महत्व के विषय।
- राज्य सूची (State List): पुलिस, लोक व्यवस्था, कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्थानीय शासन।
- समवर्ती सूची (Concurrent List): शिक्षा, वन, विवाह, आपराधिक कानून आदि विषय, जिन पर केंद्र एवं राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
केंद्र–राज्य संबंध
- विधायी संबंध।
- प्रशासनिक संबंध।
- वित्तीय संबंध।
- अंतर-सरकारी समन्वय।
- संवैधानिक तंत्र के माध्यम से विवादों का समाधान।
प्रमुख संवैधानिक संस्थाएँ
- वित्त आयोग: केंद्र एवं राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के वितरण की सिफारिश करता है।
- GST परिषद: अनुच्छेद 279A के अंतर्गत सहकारी राजकोषीय निर्णयों का मंच।
- अंतर्राज्यीय परिषद: अनुच्छेद 263 के अंतर्गत नीति समन्वय एवं सहयोग को बढ़ावा देती है।
- नीति आयोग (NITI Aayog): सहकारी एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद को प्रोत्साहित करता है।
सहकारी एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद
- सहकारी संघवाद: केंद्र एवं राज्य मिलकर राष्ट्रीय विकास के लिए कार्य करते हैं।
- प्रतिस्पर्धी संघवाद: राज्य बेहतर प्रशासन, निवेश, नवाचार एवं सार्वजनिक सेवाओं के लिए स्वस्थ प्रतिस्पर्धा करते हैं।
- दोनों मॉडल संतुलित क्षेत्रीय विकास एवं प्रभावी शासन को सुदृढ़ करते हैं।
समकालीन संघीय चुनौतियाँ
- राजकोषीय संघवाद एवं करों का बँटवारा।
- क्षेत्रीय विकास में असमानताएँ।
- अंतर्राज्यीय नदी जल विवाद।
- आपदा प्रबंधन में समन्वय।
- जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरणीय शासन।
- डिजिटल शासन एवं सहकारी नीति निर्माण।
UPSC दृष्टिकोण
- अनुच्छेद 1–4, 245–263, 279A एवं 280 अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
- सातवीं अनुसूची तथा तीनों सूचियों का तुलनात्मक अध्ययन करें।
- सहकारी एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद के बीच अंतर स्पष्ट रूप से समझें।
- उत्तर लेखन में वित्त आयोग, GST परिषद एवं अंतर्राज्यीय परिषद का उल्लेख करें।
- संवैधानिक प्रावधानों को समकालीन केंद्र–राज्य संबंधों एवं शासन संबंधी मुद्दों से जोड़कर लिखें।
त्वरित पुनरावृत्ति
- अनुच्छेद 1 भारत को "राज्यों का संघ" घोषित करता है।
- सातवीं अनुसूची में संघ, राज्य एवं समवर्ती सूचियाँ शामिल हैं।
- अनुच्छेद 263 अंतर्राज्यीय परिषद से संबंधित है।
- अनुच्छेद 279A GST परिषद से संबंधित है।
- अनुच्छेद 280 वित्त आयोग से संबंधित है।
- भारतीय संघवाद संविधान की मूल विशेषताओं में से एक है और UPSC के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
भाग 3 – UPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न एवं मॉडल उत्तर
प्रश्न 1 (10 अंक)
"भारतीय संघीय व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की व्याख्या कीजिए। यह राष्ट्रीय एकता एवं राज्यों की स्वायत्तता के बीच संतुलन किस प्रकार स्थापित करती है?"
मॉडल उत्तर
परिचय:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार भारत "राज्यों का संघ" है। भारतीय संघीय व्यवस्था संघीय सिद्धांतों तथा एक सशक्त केंद्र के बीच संतुलन स्थापित करती है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, प्रभावी शासन तथा राज्यों की संवैधानिक स्वायत्तता को सुरक्षित रखना है।
भारतीय संघीय व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ:
- लिखित एवं सर्वोच्च संविधान।
- संविधान द्वारा शक्तियों का विभाजन।
- सातवीं अनुसूची के अंतर्गत संघ, राज्य एवं समवर्ती सूचियाँ।
- स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका।
- संसदीय शासन प्रणाली।
- एकल नागरिकता तथा मजबूत केंद्र।
राष्ट्रीय एकता एवं राज्यों की स्वायत्तता के बीच संतुलन:
- विधायी, प्रशासनिक एवं वित्तीय शक्तियों का संवैधानिक विभाजन।
- वित्त आयोग द्वारा वित्तीय संसाधनों का न्यायसंगत वितरण।
- GST परिषद के माध्यम से सहमति आधारित निर्णय।
- अंतर्राज्यीय परिषद द्वारा नीति समन्वय।
- सर्वोच्च न्यायालय द्वारा केंद्र–राज्य विवादों का समाधान।
निष्कर्ष:
भारतीय संघीय व्यवस्था विविधता में एकता की भावना को मजबूत करती है तथा सहकारी शासन के माध्यम से संतुलित एवं समावेशी राष्ट्रीय विकास का मार्ग प्रशस्त करती है।
प्रश्न 2 (15 अंक)
"सहकारी संघवाद एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद भारत के संतुलित विकास के दो पूरक स्तंभ हैं।" समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
मॉडल उत्तर
परिचय:
भारतीय संघीय व्यवस्था में सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) तथा प्रतिस्पर्धी संघवाद (Competitive Federalism) दोनों का महत्वपूर्ण स्थान है। एक ओर सहयोगात्मक नीति निर्माण होता है, वहीं दूसरी ओर राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकास को गति देती है।
सहकारी संघवाद का महत्व:
- केंद्र एवं राज्यों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।
- राष्ट्रीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता करता है।
- GST परिषद एवं अंतर्राज्यीय परिषद जैसी संस्थाओं को सुदृढ़ करता है।
- आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं अवसंरचना में समन्वय स्थापित करता है।
प्रतिस्पर्धी संघवाद का महत्व:
- बेहतर प्रशासन एवं नवाचार को प्रोत्साहित करता है।
- निवेश आकर्षित करने की क्षमता बढ़ाता है।
- Ease of Doing Business तथा सार्वजनिक सेवाओं में सुधार करता है।
- राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित करता है।
प्रमुख चुनौतियाँ:
- क्षेत्रीय आर्थिक असमानताएँ।
- राजकोषीय असंतुलन।
- अंतर्राज्यीय जल विवाद।
- प्रशासनिक क्षमता में अंतर।
- राष्ट्रीय नीतियों के समन्वित क्रियान्वयन की चुनौतियाँ।
आगे की दिशा (Way Forward):
- राजकोषीय संघवाद को और अधिक मजबूत बनाया जाए।
- वित्त आयोग एवं GST परिषद की भूमिका को प्रभावी बनाया जाए।
- साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को बढ़ावा दिया जाए।
- केंद्र एवं राज्यों के बीच निरंतर संवाद स्थापित किया जाए।
- पिछड़े क्षेत्रों के संतुलित विकास हेतु विशेष रणनीतियाँ अपनाई जाएँ।
निष्कर्ष:
सहकारी एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद का संतुलित समन्वय भारत को समावेशी विकास, राष्ट्रीय एकता, आर्थिक प्रगति तथा प्रभावी लोकतांत्रिक शासन की दिशा में आगे बढ़ाता है।
UPSC उत्तर लेखन सुझाव
- उत्तर की शुरुआत अनुच्छेद 1 तथा "राज्यों का संघ" की अवधारणा से करें।
- अनुच्छेद 245–263, 279A एवं 280 का उपयुक्त उल्लेख करें।
- सातवीं अनुसूची (संघ सूची, राज्य सूची एवं समवर्ती सूची) का संक्षिप्त चित्र या तालिका बनाएं।
- वित्त आयोग, GST परिषद, अंतर्राज्यीय परिषद एवं नीति आयोग के उदाहरण अवश्य दें।
- समकालीन विषयों जैसे राजकोषीय संघवाद, डिजिटल शासन, जलवायु परिवर्तन एवं केंद्र–राज्य समन्वय को उत्तर से जोड़ें।
- निष्कर्ष में सहकारी संघवाद, राष्ट्रीय एकता, सुशासन एवं समावेशी विकास जैसे संवैधानिक मूल्यों का उल्लेख करें।
भाग 4 – UPSC प्रारंभिक परीक्षा (Prelims MCQs)
प्रश्न 1
भारतीय संविधान के अनुसार भारत को किस रूप में वर्णित किया गया है?
- संघीय गणराज्य
- राज्यों का संघ (Union of States)
- राज्यों का परिसंघ
- एकात्मक राज्य
प्रश्न 2
अंतर्राज्यीय परिषद (Inter-State Council) की स्थापना संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत की गई है?
- अनुच्छेद 249
- अनुच्छेद 252
- अनुच्छेद 263
- अनुच्छेद 280
प्रश्न 3
केंद्र एवं राज्यों के बीच करों के वितरण की सिफारिश करने वाला संवैधानिक निकाय कौन-सा है?
- भारत निर्वाचन आयोग
- वित्त आयोग
- GST परिषद
- अंतर्राज्यीय परिषद
प्रश्न 4
GST परिषद का गठन संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत किया गया है?
- अनुच्छेद 263
- अनुच्छेद 279A
- अनुच्छेद 280
- अनुच्छेद 324
प्रश्न 5
संविधान की सातवीं अनुसूची में विधायी शक्तियों का विभाजन कितनी सूचियों में किया गया है?
- दो सूचियाँ
- तीन सूचियाँ
- चार सूचियाँ
- पाँच सूचियाँ
त्वरित पुनरावृत्ति
- अनुच्छेद 1 भारत को "राज्यों का संघ" घोषित करता है।
- अनुच्छेद 245–263 केंद्र–राज्य विधायी एवं प्रशासनिक संबंधों से संबंधित हैं।
- अनुच्छेद 263 अंतर्राज्यीय परिषद से संबंधित है।
- अनुच्छेद 279A GST परिषद की स्थापना का प्रावधान करता है।
- अनुच्छेद 280 वित्त आयोग से संबंधित है।
- सातवीं अनुसूची में संघ सूची, राज्य सूची एवं समवर्ती सूची का प्रावधान है।
- भारतीय संघवाद UPSC प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
आज की प्रेरणा
"सहयोग से विकास होता है।
संविधान से राष्ट्र सशक्त बनता है।
ज्ञान से नेतृत्व विकसित होता है।
एकता और उत्तरदायित्व ही प्रगति का आधार हैं।"
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