डेली करेंट अफेयर्स 2026
केंद्रीय बजट, आर्थिक सर्वेक्षण एवं कराधान
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), राज्य लोक सेवा आयोग, बैंकिंग, SSC, RBI ग्रेड-B, NABARD तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रीमियम अध्ययन सामग्री।
आज का विषय क्यों महत्वपूर्ण है?
केंद्रीय बजट, आर्थिक सर्वेक्षण एवं कराधान किसी भी देश की आर्थिक नीति के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। इनके माध्यम से सरकार विकास योजनाओं, सार्वजनिक व्यय, कर सुधार, रोजगार सृजन तथा सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों को दिशा देती है। UPSC तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में इन विषयों से नियमित रूप से प्रश्न पूछे जाते हैं।
आज के अध्ययन के उद्देश्य
- केंद्रीय बजट की संरचना एवं उद्देश्य को समझना।
- आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) का महत्व जानना।
- प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों की मूल अवधारणाओं का अध्ययन करना।
- सरकारी राजस्व एवं सार्वजनिक व्यय की भूमिका को समझना।
- बजट एवं कराधान को समसामयिक आर्थिक घटनाओं से जोड़ना।
करेंट अफेयर्स परिप्रेक्ष्य
प्रत्येक वर्ष केंद्रीय बजट सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं, विकास योजनाओं तथा वित्तीय रणनीतियों को प्रस्तुत करता है। आर्थिक सर्वेक्षण देश की आर्थिक स्थिति का विश्लेषण करता है तथा आगामी नीतिगत निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान करता है। कराधान प्रणाली सरकार के लिए राजस्व का प्रमुख स्रोत है।
परीक्षा में महत्व
केंद्रीय बजट, आर्थिक सर्वेक्षण, प्रत्यक्ष कर, अप्रत्यक्ष कर, GST, राजस्व घाटा, राजकोषीय घाटा तथा सार्वजनिक व्यय जैसे विषय UPSC सामान्य अध्ययन (GS Paper III), बैंकिंग, RBI ग्रेड-B, NABARD तथा SSC परीक्षाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य अवधारणाएँ
- केंद्रीय बजट (Union Budget)
- आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey)
- प्रत्यक्ष कर (Direct Tax)
- अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax)
- वस्तु एवं सेवा कर (GST)
- राजस्व प्राप्तियाँ एवं व्यय
- राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit)
- सार्वजनिक वित्त (Public Finance)
त्वरित पुनरावृत्ति
- केंद्रीय बजट सरकार की वार्षिक आय-व्यय योजना है।
- आर्थिक सर्वेक्षण देश की आर्थिक स्थिति का विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
- प्रत्यक्ष कर सीधे व्यक्ति या संस्था से लिया जाता है।
- अप्रत्यक्ष कर वस्तुओं एवं सेवाओं पर लगाया जाता है।
- GST भारत की प्रमुख अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था है।
UPSC स्मार्ट टिप
इस क्रम को हमेशा याद रखें— आर्थिक सर्वेक्षण → केंद्रीय बजट → कराधान → सरकारी व्यय → विकास योजनाएँ → आर्थिक विकास यह क्रम UPSC प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा दोनों में उत्तर लेखन तथा अवधारणाओं को समझने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
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विशेष विषय
केंद्रीय बजट (Union Budget) – उद्देश्य, संरचना एवं महत्व
केंद्रीय बजट भारत सरकार का वार्षिक वित्तीय दस्तावेज़ है, जिसमें आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सरकार की अनुमानित आय (Revenue) तथा व्यय (Expenditure) का विवरण प्रस्तुत किया जाता है। इसे प्रत्येक वर्ष संसद में वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। यह देश की आर्थिक दिशा, विकास योजनाओं तथा वित्तीय प्राथमिकताओं को निर्धारित करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है।
केंद्रीय बजट के प्रमुख उद्देश्य
- देश के आर्थिक विकास को गति देना।
- रोजगार के अवसरों का विस्तार करना।
- गरीबी एवं असमानता को कम करना।
- सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराना।
- आधारभूत संरचना (Infrastructure) का विकास करना।
- राजकोषीय अनुशासन एवं वित्तीय स्थिरता बनाए रखना।
केंद्रीय बजट की संरचना
| घटक | विवरण |
|---|---|
| राजस्व प्राप्तियाँ | कर एवं गैर-कर आय। |
| पूंजी प्राप्तियाँ | ऋण, विनिवेश एवं अन्य पूंजीगत स्रोत। |
| राजस्व व्यय | वेतन, पेंशन, सब्सिडी एवं प्रशासनिक व्यय। |
| पूंजीगत व्यय | सड़क, रेलवे, ऊर्जा एवं अन्य विकास परियोजनाओं पर निवेश। |
केंद्रीय बजट का महत्व
- देश की आर्थिक नीति की दिशा निर्धारित करता है।
- सार्वजनिक निवेश एवं विकास योजनाओं को प्रोत्साहित करता है।
- कर प्रणाली में सुधार लाता है।
- व्यापार एवं उद्योग के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है।
- समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।
समसामयिक महत्व
हाल के वर्षों में केंद्रीय बजट में डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा, बुनियादी ढाँचे, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्टार्टअप, MSME तथा कौशल विकास जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। ये विषय UPSC तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
UPSC स्मार्ट टिप
उत्तर लिखते समय इस क्रम का पालन करें— बजट → आय → व्यय → विकास योजनाएँ → रोजगार → आर्थिक विकास इस प्रकार की प्रस्तुति उत्तर को व्यवस्थित एवं प्रभावशाली बनाती है।
मुख्य तथ्य
- केंद्रीय बजट भारत सरकार का वार्षिक वित्तीय दस्तावेज़ है।
- इसे संसद में वित्त मंत्री प्रस्तुत करते हैं।
- इसमें सरकार की आय एवं व्यय का विस्तृत विवरण होता है।
- यह आर्थिक विकास एवं सामाजिक कल्याण का प्रमुख आधार है।
- UPSC में बजट एवं सार्वजनिक वित्त से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
विशेष विषय – भाग 2
आर्थिक सर्वेक्षण, कराधान एवं राजकोषीय घाटा
आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) भारत सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष केंद्रीय बजट से पहले संसद में प्रस्तुत किया जाने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है। इसमें देश की आर्थिक स्थिति, विकास दर, रोजगार, मुद्रास्फीति, कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र तथा भविष्य की आर्थिक संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया जाता है।
आर्थिक सर्वेक्षण का महत्व
- देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति का व्यापक विश्लेषण।
- नीति निर्माण के लिए तथ्य एवं सुझाव उपलब्ध कराना।
- विकास की चुनौतियों एवं अवसरों की पहचान।
- केंद्रीय बजट के लिए आधार तैयार करना।
- UPSC एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण स्रोत।
कराधान (Taxation)
कराधान सरकार की आय का प्रमुख स्रोत है। करों से प्राप्त राजस्व का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा, आधारभूत संरचना, सामाजिक सुरक्षा तथा विकास योजनाओं के लिए किया जाता है।
| प्रत्यक्ष कर | अप्रत्यक्ष कर |
|---|---|
| आयकर (Income Tax) | GST (वस्तु एवं सेवा कर) |
| कॉर्पोरेट कर | सीमा शुल्क एवं अन्य अप्रत्यक्ष कर |
राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit)
जब सरकार का कुल व्यय उसकी कुल प्राप्तियों (उधार को छोड़कर) से अधिक होता है, तो उस अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। यह सरकार की उधारी की आवश्यकता को दर्शाता है।
राजकोषीय घाटे के प्रमुख कारण
- सरकारी व्यय में वृद्धि।
- कर राजस्व में कमी।
- आर्थिक मंदी।
- कल्याणकारी योजनाओं पर अधिक व्यय।
- बुनियादी ढाँचे में बड़े निवेश।
राजकोषीय घाटा कम करने के उपाय
- कर संग्रह में सुधार।
- अनावश्यक सरकारी व्यय में कमी।
- विनिवेश (Disinvestment) को बढ़ावा।
- आर्थिक विकास एवं निवेश को प्रोत्साहन।
- पारदर्शी एवं उत्तरदायी वित्तीय प्रबंधन।
समसामयिक महत्व
UPSC मुख्य परीक्षा में केंद्रीय बजट, आर्थिक सर्वेक्षण, कर सुधार, GST, सार्वजनिक वित्त तथा राजकोषीय घाटे से जुड़े प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इसलिए इन विषयों को वर्तमान आर्थिक घटनाओं के साथ जोड़कर समझना आवश्यक है।
UPSC स्मार्ट टिप
इस क्रम को याद रखें— आर्थिक सर्वेक्षण → बजट → कर संग्रह → सरकारी व्यय → राजकोषीय घाटा → आर्थिक विकास यह फ्लो UPSC उत्तर लेखन में उत्तर को तार्किक एवं प्रभावशाली बनाता है।
त्वरित पुनरावृत्ति
- आर्थिक सर्वेक्षण बजट से पहले प्रस्तुत किया जाता है।
- कराधान सरकार की आय का मुख्य स्रोत है।
- GST भारत की प्रमुख अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था है।
- राजकोषीय घाटा सरकार की उधारी की आवश्यकता को दर्शाता है।
- संतुलित सार्वजनिक वित्त सतत आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है।
भाग 3A
UPSC मुख्य परीक्षा – अभ्यास प्रश्न
केंद्रीय बजट, आर्थिक सर्वेक्षण एवं कराधान भारतीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण विषय हैं। UPSC मुख्य परीक्षा में इनसे संबंधित प्रश्न विद्यार्थियों की विश्लेषणात्मक क्षमता, आर्थिक समझ तथा समसामयिक घटनाओं से जुड़ाव का परीक्षण करते हैं।
UPSC मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न
-
केंद्रीय बजट (Union Budget) के प्रमुख उद्देश्यों की व्याख्या कीजिए। यह आर्थिक विकास एवं सामाजिक कल्याण में किस प्रकार योगदान देता है?
(150 शब्द | 10 अंक) -
आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) का महत्व स्पष्ट कीजिए। यह नीति निर्माण में किस प्रकार सहायक होता है?
(150 शब्द | 10 अंक) -
प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) एवं अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) में अंतर स्पष्ट करते हुए भारतीय कर प्रणाली में इनके महत्व का विश्लेषण कीजिए।
(250 शब्द | 15 अंक) -
राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) क्या है? इसके प्रमुख कारणों, प्रभावों तथा इसे नियंत्रित करने के उपायों की चर्चा कीजिए।
(250 शब्द | 15 अंक) -
समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास के लिए केंद्रीय बजट में किन प्राथमिकताओं को स्थान दिया जाना चाहिए? उपयुक्त उदाहरणों सहित स्पष्ट कीजिए।
(250 शब्द | 15 अंक)
उत्तर लेखन दिशा-निर्देश
- उत्तर की शुरुआत विषय की स्पष्ट परिभाषा से करें।
- उपशीर्षकों एवं बिंदुवार प्रस्तुति का उपयोग करें।
- आर्थिक सर्वेक्षण एवं बजट से जुड़े समसामयिक उदाहरण शामिल करें।
- चुनौतियों के साथ व्यावहारिक समाधान अवश्य लिखें।
- उत्तर का समापन संतुलित एवं भविष्य-दृष्टि वाले निष्कर्ष से करें।
UPSC उत्तर लेखन रणनीति
आर्थिक विषयों पर उत्तर लिखते समय निम्नलिखित क्रम अपनाएँ— परिचय → अवधारणा → महत्व → वर्तमान परिप्रेक्ष्य → चुनौतियाँ → सुधारात्मक उपाय → निष्कर्ष जहाँ संभव हो, सरल फ्लोचार्ट का उपयोग करें: बजट → कर संग्रह → सरकारी व्यय → आधारभूत संरचना → रोजगार → आर्थिक विकास या आर्थिक सर्वेक्षण → नीति निर्माण → सुधार → निवेश → विकास → समावेशी वृद्धि इस प्रकार की संरचित प्रस्तुति UPSC मुख्य परीक्षा में उत्तर को अधिक प्रभावशाली बनाती है।
भाग 3B
UPSC मुख्य परीक्षा – मॉडल उत्तर
प्रश्न
"केंद्रीय बजट केवल सरकार की आय-व्यय योजना नहीं है, बल्कि यह देश के आर्थिक विकास एवं सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण साधन है।" इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए।
(250 शब्द | 15 अंक)
मॉडल उत्तर
प्रस्तावना
केंद्रीय बजट भारत सरकार का वार्षिक वित्तीय दस्तावेज़ है, जिसमें आगामी वित्तीय वर्ष के लिए आय, व्यय, कर नीति तथा विकास संबंधी प्राथमिकताओं का विवरण प्रस्तुत किया जाता है। यह केवल वित्तीय लेखा-जोखा नहीं, बल्कि देश की आर्थिक दिशा एवं विकास रणनीति का प्रमुख आधार है।
आर्थिक विकास में केंद्रीय बजट की भूमिका
- आधारभूत संरचना (Infrastructure) में निवेश को बढ़ावा देता है।
- रोजगार सृजन के लिए विभिन्न योजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
- कृषि, उद्योग एवं सेवा क्षेत्र के विकास को प्रोत्साहित करता है।
- निजी निवेश एवं उद्यमिता के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था एवं नवाचार को प्रोत्साहन देता है।
सामाजिक परिवर्तन में योगदान
- शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय बढ़ाता है।
- गरीब एवं वंचित वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को समर्थन देता है।
- महिला सशक्तिकरण एवं कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देता है।
- ग्रामीण विकास एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करता है।
- हरित विकास एवं सतत विकास लक्ष्यों को प्रोत्साहित करता है।
मुख्य चुनौतियाँ
- राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखना।
- विकास एवं वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखना।
- संसाधनों का प्रभावी एवं पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना।
- क्षेत्रीय एवं सामाजिक असमानताओं को कम करना।
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का सामना करना।
आगे की राह
- पूंजीगत व्यय में निरंतर वृद्धि।
- कर प्रणाली को अधिक सरल एवं पारदर्शी बनाना।
- MSME, स्टार्टअप एवं नवाचार को प्रोत्साहन देना।
- मानव संसाधन विकास में निवेश बढ़ाना।
- प्रौद्योगिकी आधारित सार्वजनिक वित्त प्रबंधन को सुदृढ़ करना।
निष्कर्ष
एक प्रभावी केंद्रीय बजट आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय तथा समावेशी प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करता है। यदि बजट में दीर्घकालिक विकास, वित्तीय अनुशासन तथा जनकल्याण को समान महत्व दिया जाए, तो भारत विकसित एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में और अधिक सशक्त कदम बढ़ा सकता है।
UPSC उत्तर लेखन सुझाव
- उत्तर की शुरुआत बजट की परिभाषा से करें।
- आर्थिक एवं सामाजिक प्रभावों को अलग-अलग शीर्षकों में लिखें।
- समसामयिक बजट सुधारों एवं आर्थिक सर्वेक्षण के संदर्भ जोड़ें।
- आरेख या फ्लोचार्ट का उपयोग करने पर उत्तर अधिक प्रभावशाली बनता है।
- संतुलित एवं समाधान-आधारित निष्कर्ष अवश्य लिखें।
परीक्षा विशेष तथ्य
UPSC मुख्य परीक्षा में केंद्रीय बजट, आर्थिक सर्वेक्षण, कर सुधार, GST, प्रत्यक्ष कर, अप्रत्यक्ष कर, राजकोषीय घाटा, पूंजीगत व्यय, सार्वजनिक वित्त तथा समावेशी विकास जैसे प्रमुख शब्दों का उचित उपयोग उत्तर की गुणवत्ता को बेहतर बनाता है।
भाग 4A
UPSC प्रारंभिक परीक्षा – वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्न UPSC प्रारंभिक परीक्षा, राज्य लोक सेवा आयोग, बैंकिंग, RBI ग्रेड-B तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के नवीनतम पैटर्न को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
अभ्यास प्रश्न
-
भारत का केंद्रीय बजट संसद में कौन प्रस्तुत करता है?
A. प्रधानमंत्री
B. वित्त मंत्री
C. राष्ट्रपति
D. भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर -
आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A. केवल करों की घोषणा करना
B. देश की आर्थिक स्थिति का विश्लेषण प्रस्तुत करना
C. केवल सरकारी व्यय बताना
D. विदेशी व्यापार का नियंत्रण करना -
निम्नलिखित में से कौन-सा प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) है?
A. वस्तु एवं सेवा कर (GST)
B. सीमा शुल्क (Custom Duty)
C. आयकर (Income Tax)
D. उत्पाद शुल्क (Excise Duty) -
राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) का अर्थ है—
A. सरकार की कुल आय, कुल व्यय से अधिक होना
B. सरकार के कुल व्यय और कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर (उधार को छोड़कर)
C. केवल विदेशी ऋण में वृद्धि
D. केवल कर संग्रह में कमी -
GST का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
A. अनेक अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत करना
B. आयकर समाप्त करना
C. केवल निर्यात बढ़ाना
D. बैंकिंग प्रणाली का नियंत्रण
उत्तर कुंजी
- 1 — B
- 2 — B
- 3 — C
- 4 — B
- 5 — A
परीक्षा फोकस
UPSC प्रारंभिक परीक्षा में केंद्रीय बजट, आर्थिक सर्वेक्षण, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर, GST, राजकोषीय घाटा, सार्वजनिक वित्त तथा सरकारी व्यय से संबंधित अवधारणात्मक प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
त्वरित तैयारी सुझाव
बजट एवं कराधान से जुड़े प्रश्नों की तैयारी करते समय प्रत्येक शब्द की स्पष्ट परिभाषा, उसके उद्देश्य तथा वर्तमान आर्थिक संदर्भ को समझें। इससे तथ्यात्मक एवं विश्लेषणात्मक दोनों प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देना आसान होगा।
भाग 4B
UPSC प्रारंभिक परीक्षा – उत्तरों की विस्तृत व्याख्या
UPSC प्रारंभिक परीक्षा में केवल सही उत्तर याद रखना पर्याप्त नहीं होता। प्रत्येक उत्तर के पीछे की अवधारणा, उसका उद्देश्य तथा व्यावहारिक उपयोग समझना अधिक महत्वपूर्ण है। इससे नए एवं विश्लेषणात्मक प्रश्नों को हल करना आसान हो जाता है।
उत्तरों की विस्तृत व्याख्या
1. सही उत्तर: (B) वित्त मंत्री
भारत का केंद्रीय बजट प्रत्येक वर्ष संसद में भारत के वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। इसमें सरकार की आगामी वित्तीय वर्ष की आय, व्यय तथा आर्थिक नीतियों का विवरण होता है।
2. सही उत्तर: (B) देश की आर्थिक स्थिति का विश्लेषण प्रस्तुत करना
आर्थिक सर्वेक्षण केंद्रीय बजट से पहले प्रस्तुत किया जाता है। इसमें देश की आर्थिक प्रगति, चुनौतियों, अवसरों तथा नीतिगत सुझावों का विस्तृत विश्लेषण होता है।
3. सही उत्तर: (C) आयकर (Income Tax)
आयकर प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) है क्योंकि इसे आय अर्जित करने वाले व्यक्ति या संस्था द्वारा सीधे सरकार को दिया जाता है। जबकि GST, सीमा शुल्क एवं उत्पाद शुल्क अप्रत्यक्ष करों की श्रेणी में आते हैं।
4. सही उत्तर: (B) सरकार के कुल व्यय और कुल प्राप्तियों के बीच का अंतर (उधार को छोड़कर)
राजकोषीय घाटा यह दर्शाता है कि सरकार को अपने व्यय की पूर्ति के लिए कितना अतिरिक्त उधार लेना पड़ेगा। यह वित्तीय अनुशासन का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
5. सही उत्तर: (A) अनेक अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत करना
GST (Goods and Services Tax) का उद्देश्य विभिन्न अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत करके पूरे देश में एक समान कर व्यवस्था लागू करना तथा कर प्रणाली को सरल एवं पारदर्शी बनाना है।
त्वरित पुनरावृत्ति
- केंद्रीय बजट वित्त मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत किया जाता है।
- आर्थिक सर्वेक्षण देश की आर्थिक स्थिति का विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
- आयकर प्रत्यक्ष कर का प्रमुख उदाहरण है।
- GST भारत की एकीकृत अप्रत्यक्ष कर प्रणाली है।
- राजकोषीय घाटा सरकार की वित्तीय स्थिति का महत्वपूर्ण संकेतक है।
- बजट एवं कराधान आर्थिक विकास की दिशा निर्धारित करते हैं।
UPSC स्मार्ट रिवीजन बॉक्स
- केंद्रीय बजट → सरकार की वार्षिक आय-व्यय योजना
- आर्थिक सर्वेक्षण → आर्थिक विश्लेषण एवं नीति सुझाव
- आयकर → प्रत्यक्ष कर
- GST → एकीकृत अप्रत्यक्ष कर प्रणाली
- राजकोषीय घाटा → कुल व्यय − कुल प्राप्तियाँ (उधार को छोड़कर)
- सार्वजनिक व्यय → विकास एवं कल्याण का आधार
परीक्षा विशेष सुझाव
UPSC प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी करते समय केंद्रीय बजट, आर्थिक सर्वेक्षण, कर सुधार, GST, राजकोषीय घाटा तथा सार्वजनिक वित्त को समसामयिक आर्थिक घटनाओं से जोड़कर पढ़ें। इससे अवधारणात्मक समझ मजबूत होगी और नए प्रकार के प्रश्नों को हल करने में आसानी होगी।
अगला अध्याय
पृष्ठ 4 में हम भारतीय बैंकिंग प्रणाली, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), वित्तीय समावेशन, डिजिटल बैंकिंग, UPI एवं फिनटेक का विस्तृत अध्ययन करेंगे। इसमें डेली करेंट अफेयर्स, विशेष विषय, UPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न एवं मॉडल उत्तर तथा प्रारंभिक परीक्षा MCQs शामिल होंगे।
शक्तिमाता लर्निंग – Premium Multilingual Educational Ecosystem
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