पेज 2 – दैनिक समसामयिकी
दिनांक: 26 जून 2026
भाग 1 – दैनिक समसामयिकी
1. ब्लू इकोनॉमी और समुद्री विकास
भारत समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग, तटीय विकास, मत्स्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण तथा समुद्री अवसंरचना को मजबूत करने के माध्यम से ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा दे रहा है। इसका उद्देश्य आर्थिक विकास और समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।
• अर्थव्यवस्था
• पर्यावरण
• समुद्री सुरक्षा
• सतत विकास
2. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)
डिजिटल पहचान, डिजिटल भुगतान तथा ऑनलाइन सरकारी सेवाओं के माध्यम से डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर सुशासन, पारदर्शिता और वित्तीय समावेशन को नई दिशा प्रदान कर रहा है।
• सुशासन
• डिजिटल इंडिया
• ई-गवर्नेंस
3. खाद्य सुरक्षा एवं पोषण
जलवायु-अनुकूल कृषि, खाद्य भंडारण क्षमता में वृद्धि तथा पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करने के प्रयास देश में समावेशी एवं सतत विकास को बढ़ावा दे रहे हैं।
• कृषि
• खाद्य सुरक्षा
• समावेशी विकास
4. राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा
डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना, सरकारी नेटवर्क तथा नागरिकों के डेटा की सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है।
• आंतरिक सुरक्षा
• साइबर सुरक्षा
• विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
5. महिला-नेतृत्व वाला आर्थिक विकास
महिला उद्यमिता, कौशल विकास, वित्तीय समावेशन और रोजगार के अवसरों का विस्तार भारत के समावेशी आर्थिक विकास एवं सामाजिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
• सामाजिक न्याय
• महिला सशक्तिकरण
• समावेशी विकास
भाग 2 – विशेष विषय
भारतीय संसद
भारतीय संसद देश की सर्वोच्च विधायिका (Legislature) है। यह जनता का प्रतिनिधित्व करती है, कानून बनाती है, सरकार को उत्तरदायी बनाती है तथा लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करती है।
संसद की संरचना
- भारत के राष्ट्रपति
- लोकसभा (जनप्रतिनिधि सभा)
- राज्यसभा (राज्यों की परिषद)
इन तीनों से मिलकर भारतीय संसद का गठन होता है।
संसद के प्रमुख कार्य
- देश के लिए कानून बनाना।
- केंद्रीय बजट एवं वित्तीय प्रस्तावों को स्वीकृति देना।
- कार्यपालिका (Executive) को उत्तरदायी बनाना।
- राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करना।
- आवश्यक होने पर संविधान में संशोधन करना।
- जनता की आकांक्षाओं एवं हितों का प्रतिनिधित्व करना।
लोकसभा एवं राज्यसभा में अंतर
| लोकसभा | राज्यसभा |
|---|---|
| प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा निर्वाचित। | राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुनी जाती है। |
| अधिकतम सदस्य संख्या 552। | अधिकतम सदस्य संख्या 250। |
| सामान्य कार्यकाल पाँच वर्ष। | स्थायी सदन; प्रत्येक दो वर्ष में एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं। |
| धन विधेयक (Money Bill) पर अधिक अधिकार। | धन विधेयक पर केवल सिफारिश कर सकती है। |
UPSC के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
- अनुच्छेद 79 – संसद का गठन।
- प्रश्नकाल (Question Hour)।
- शून्यकाल (Zero Hour)।
- संसदीय समितियाँ।
- धन विधेयक एवं साधारण विधेयक।
- संयुक्त बैठक (Joint Sitting)।
त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)
- संसद = राष्ट्रपति + लोकसभा + राज्यसभा।
- लोकसभा जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुनी जाती है।
- राज्यसभा एक स्थायी सदन है।
- धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है।
- अनुच्छेद 79 संसद के गठन से संबंधित है।
भाग 3 – UPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न एवं मॉडल उत्तर
प्रश्न 1 (10 अंक)
"भारतीय लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने में संसद की भूमिका की विवेचना कीजिए।"
मॉडल उत्तर
परिचय:
भारतीय संसद संविधान के अंतर्गत स्थापित सर्वोच्च विधायी संस्था है। यह जनता का प्रतिनिधित्व करती है, कानून बनाती है तथा कार्यपालिका को उत्तरदायी बनाकर लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करती है।
संसद की भूमिका:
- देश के लिए कानूनों का निर्माण करना।
- जनता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करना।
- बजट एवं सार्वजनिक व्यय पर नियंत्रण रखना।
- प्रश्नकाल, शून्यकाल एवं संसदीय समितियों के माध्यम से सरकार को उत्तरदायी बनाना।
- संविधान संशोधन करना।
- राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करना।
चुनौतियाँ:
- संसदीय कार्यवाही में बार-बार व्यवधान।
- विधेयकों पर सीमित चर्चा।
- राजनीतिक ध्रुवीकरण।
- संसदीय समय का प्रभावी उपयोग न होना।
आगे की राह:
- संसदीय समितियों को और अधिक प्रभावी बनाना।
- विधेयकों पर विस्तृत चर्चा सुनिश्चित करना।
- पारदर्शिता एवं जनभागीदारी को बढ़ावा देना।
- संसद सदस्यों के लिए शोध एवं तकनीकी सहायता को मजबूत करना।
निष्कर्ष:
संसद भारतीय लोकतंत्र का आधार स्तंभ है। इसकी प्रभावी कार्यप्रणाली संविधान, सुशासन एवं जनविश्वास को मजबूत बनाती है।
प्रश्न 2 (15 अंक)
"लोकसभा एवं राज्यसभा के मध्य अंतर स्पष्ट कीजिए। भारतीय संसदीय व्यवस्था में दोनों सदनों के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।"
मॉडल उत्तर
परिचय:
भारतीय संसद दो सदनों—लोकसभा एवं राज्यसभा—से मिलकर बनी है। दोनों सदन लोकतांत्रिक एवं संघीय शासन व्यवस्था को संतुलित रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्य अंतर:
- लोकसभा जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित होती है, जबकि राज्यसभा राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है।
- लोकसभा का सामान्य कार्यकाल पाँच वर्ष है, जबकि राज्यसभा स्थायी सदन है।
- धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।
- मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से केवल लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
- राज्यसभा संघीय ढाँचे एवं राज्यों के हितों की रक्षा करती है।
महत्व:
- विधायी प्रक्रिया में संतुलन स्थापित करना।
- राज्यों के हितों का संरक्षण करना।
- विधेयकों की गहन समीक्षा करना।
- सहकारी संघवाद को मजबूत बनाना।
- लोकतांत्रिक विमर्श को समृद्ध करना।
निष्कर्ष:
लोकसभा और राज्यसभा दोनों एक-दूसरे की पूरक हैं। इनका समन्वित कार्य भारतीय लोकतंत्र, संघीय व्यवस्था तथा संवैधानिक शासन को मजबूत बनाता है।
UPSC उत्तर लेखन सुझाव
- उत्तर की शुरुआत संवैधानिक आधार या संबंधित अनुच्छेद से करें।
- स्पष्ट शीर्षकों एवं उपशीर्षकों का प्रयोग करें।
- संवैधानिक प्रावधानों एवं समकालीन उदाहरणों का उल्लेख करें।
- संतुलित विश्लेषण प्रस्तुत करें।
- निष्कर्ष समाधान-उन्मुख एवं संवैधानिक मूल्यों पर आधारित होना चाहिए।
भाग 4 – UPSC प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) MCQs
प्रश्न 1
भारतीय संसद का गठन संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत किया गया है?
- अनुच्छेद 32
- अनुच्छेद 79
- अनुच्छेद 124
- अनुच्छेद 356
प्रश्न 2
भारतीय संसद का कौन-सा सदन "जनप्रतिनिधि सभा" (House of the People) कहलाता है?
- राज्यसभा
- लोकसभा
- विधान परिषद
- विधानसभा
प्रश्न 3
धन विधेयक (Money Bill) केवल किस सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है?
- राज्यसभा
- सर्वोच्च न्यायालय
- लोकसभा
- राज्य विधानमंडल
प्रश्न 4
निम्नलिखित में से कौन-सा सदन एक स्थायी सदन है?
- लोकसभा
- राज्यसभा
- विधानसभा
- ग्राम सभा
प्रश्न 5
मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदायी होती है?
- राज्यसभा
- भारत के राष्ट्रपति
- सर्वोच्च न्यायालय
- लोकसभा
त्वरित पुनरावृत्ति (Quick Revision)
- अनुच्छेद 79 भारतीय संसद के गठन से संबंधित है।
- संसद = राष्ट्रपति + लोकसभा + राज्यसभा।
- लोकसभा जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित सदन है।
- राज्यसभा एक स्थायी सदन है।
- धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जाता है।
- मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
आज की प्रेरणा
"ज्ञान निरंतर सीखने से बढ़ता है।
अनुशासन आत्मविश्वास पैदा करता है।
लगातार प्रयास सफलता का मार्ग बनाते हैं।"
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