Shaktimatha Learning | UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2026 | Complete GS Course | राज्य के नीति-निर्देशक तत्व (DPSPs) | दैनिक समसामयिक घटनाएँ | विशेष विषय | UPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न एवं मॉडल उत्तर | UPSC प्रारंभिक परीक्षा MCQs | पृष्ठ 4

 

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UPSC सिविल सेवा परीक्षा – 2026

Complete GS Course

पृष्ठ 4 • भाग 1

राज्य के नीति-निर्देशक तत्व (Directive Principles of State Policy)

GS Paper II | भारतीय राजव्यवस्था | संविधान | शासन | UPSC | राज्य लोक सेवा आयोग

आज का विषय

राज्य के नीति-निर्देशक तत्व (DPSPs) भारतीय संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36–51) में वर्णित हैं। ये राज्य को सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय पर आधारित कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की स्थापना हेतु नीति संबंधी दिशा-निर्देश प्रदान करते हैं। यद्यपि ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, फिर भी शासन संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

UPSC के लिए यह विषय क्यों महत्वपूर्ण है?

  • GS Paper II का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय।
  • UPSC प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा में नियमित रूप से प्रश्न पूछे जाते हैं।
  • कल्याणकारी राज्य की अवधारणा का आधार।
  • मौलिक अधिकार एवं मौलिक कर्तव्यों से घनिष्ठ संबंध।
  • सुशासन, सामाजिक न्याय एवं सार्वजनिक नीति के लिए अत्यंत उपयोगी।

संवैधानिक ढांचा

विषय विवरण
भाग भाग IV
अनुच्छेद 36–51
प्रकृति न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं (Non-Justiciable)
मुख्य उद्देश्य कल्याणकारी राज्य की स्थापना
प्रेरणा आयरलैंड का संविधान

राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का वर्गीकरण

  • समाजवादी सिद्धांत
  • गांधीवादी सिद्धांत
  • उदारवादी-बौद्धिक सिद्धांत

मुख्य उद्देश्य

  • सामाजिक एवं आर्थिक न्याय स्थापित करना।
  • आर्थिक असमानताओं को कम करना।
  • समान न्याय एवं निःशुल्क विधिक सहायता।
  • पर्यावरण संरक्षण।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य का संवर्धन।
  • पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाना।
  • अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देना।

वर्तमान संदर्भ में महत्व

आज के समय में राज्य के नीति-निर्देशक तत्व गरीबी उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवाएँ, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल समावेशन, हरित विकास तथा सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

समसामयिक शासन से संबंध

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)
  • आयुष्मान भारत
  • डिजिटल इंडिया
  • मिशन LiFE
  • महिला सशक्तिकरण
  • हरित विकास (Green Growth)
  • सहकारी संघवाद

UPSC वैल्यू एडिशन

  • भाग IV (अनुच्छेद 36–51)।
  • आयरलैंड के संविधान से प्रेरित।
  • शासन के लिए मूलभूत दिशा-निर्देश।
  • मौलिक अधिकार एवं नीति-निर्देशक तत्व परस्पर पूरक हैं।
  • भारतीय कल्याणकारी राज्य की आधारशिला।

60 सेकंड पुनरावृत्ति

भाग IV • अनुच्छेद 36–51 • आयरलैंड का संविधान • कल्याणकारी राज्य • समाजवादी सिद्धांत • गांधीवादी सिद्धांत • उदारवादी-बौद्धिक सिद्धांत • अनुच्छेद 39A • अनुच्छेद 44 • अनुच्छेद 48A • अनुच्छेद 50 • अनुच्छेद 51

भाग 2 – विशेष विषय

राज्य के नीति-निर्देशक तत्व (Directive Principles of State Policy)

GS Paper II | भारतीय राजव्यवस्था | संविधान | भाग IV | UPSC | राज्य लोक सेवा आयोग

परिचय

राज्य के नीति-निर्देशक तत्व (Directive Principles of State Policy - DPSPs) भारतीय संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36 से 51) में वर्णित ऐसे सिद्धांत हैं जो राज्य को एक न्यायपूर्ण, समतामूलक एवं कल्याणकारी समाज की स्थापना हेतु मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। यद्यपि ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, फिर भी देश के शासन की आधारभूत नीतियाँ माने जाते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • आयरलैंड के संविधान से प्रेरित।
  • स्पेन के संविधान का भी अप्रत्यक्ष प्रभाव।
  • स्वतंत्र भारत में कल्याणकारी राज्य की स्थापना हेतु शामिल किए गए।
  • संविधान सभा ने सामाजिक एवं आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इन्हें स्वीकार किया।

संवैधानिक ढांचा

विषय विवरण
भाग भाग IV
अनुच्छेद 36–51
प्रकृति Non-Justiciable (न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं)
मुख्य उद्देश्य कल्याणकारी राज्य की स्थापना
प्रेरणा आयरलैंड का संविधान

DPSPs का वर्गीकरण

  • समाजवादी सिद्धांत – सामाजिक एवं आर्थिक न्याय, समान अवसर, श्रमिक कल्याण।
  • गांधीवादी सिद्धांत – ग्राम स्वराज, कुटीर उद्योग, पंचायत व्यवस्था, कमजोर वर्गों का संरक्षण।
  • उदारवादी एवं बौद्धिक सिद्धांत – न्यायपालिका की स्वतंत्रता, समान नागरिक संहिता, पर्यावरण संरक्षण, अंतरराष्ट्रीय शांति।

महत्वपूर्ण अनुच्छेद

अनुच्छेद विषय
38 सामाजिक व्यवस्था एवं लोक कल्याण
39 समान आर्थिक न्याय एवं संसाधनों का समान वितरण
39A समान न्याय एवं निःशुल्क विधिक सहायता
40 ग्राम पंचायतों का संगठन
44 समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code)
45 बाल शिक्षा एवं प्रारंभिक देखभाल
47 पोषण एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य
48A पर्यावरण एवं वन संरक्षण
50 कार्यपालिका एवं न्यायपालिका का पृथक्करण
51 अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा

महत्वपूर्ण सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय

  • केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)
  • मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980)
  • उन्नीकृष्णन बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (1993)
  • ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (1985)

समकालीन प्रासंगिकता

  • सतत विकास (Sustainable Development)
  • हरित विकास (Green Growth)
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति
  • सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा
  • डिजिटल समावेशन
  • महिला एवं बाल सशक्तिकरण
  • सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ

UPSC वैल्यू एडिशन

  • भाग IV – अनुच्छेद 36–51।
  • आयरलैंड के संविधान से प्रेरित।
  • DPSPs न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं।
  • मौलिक अधिकार एवं DPSPs एक-दूसरे के पूरक हैं।
  • मिनर्वा मिल्स (1980) – दोनों के बीच संतुलन आवश्यक।
  • UPSC उत्तरों में SDGs एवं कल्याणकारी राज्य की अवधारणा जोड़ना लाभदायक है।

30 सेकंड पुनरावृत्ति

  • भाग IV
  • अनुच्छेद 36–51
  • आयरलैंड का संविधान
  • कल्याणकारी राज्य
  • अनुच्छेद 39A
  • अनुच्छेद 44
  • अनुच्छेद 48A
  • अनुच्छेद 50
  • अनुच्छेद 51
  • मिनर्वा मिल्स (1980)
  • मौलिक अधिकार + DPSPs = संतुलित संविधान

भाग 3 – UPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न एवं मॉडल उत्तर

GS Paper II | भारतीय संविधान | राज्य के नीति-निर्देशक तत्व | उत्तर लेखन अभ्यास

प्रश्न 1 (10 अंक | 150 शब्द)

राज्य के नीति-निर्देशक तत्व (Directive Principles of State Policy) क्या हैं? भारतीय शासन व्यवस्था में इनके महत्व की व्याख्या कीजिए।

मॉडल उत्तर

परिचय

राज्य के नीति-निर्देशक तत्व भारतीय संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36–51) में वर्णित ऐसे सिद्धांत हैं जो राज्य को सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय पर आधारित कल्याणकारी राज्य की स्थापना हेतु मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

मुख्य बिंदु

  • कल्याणकारी राज्य की स्थापना।
  • सामाजिक एवं आर्थिक न्याय।
  • गरीबी एवं असमानता को कम करना।
  • समान अवसर उपलब्ध कराना।
  • लोककल्याणकारी नीतियों का आधार।

निष्कर्ष

यद्यपि DPSPs न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं, फिर भी वे सुशासन एवं समावेशी विकास के लिए अनिवार्य संवैधानिक दिशा-निर्देश हैं।

प्रश्न 2 (15 अंक | 250 शब्द)

"मौलिक अधिकार एवं राज्य के नीति-निर्देशक तत्व भारतीय संविधान के दो पूरक स्तंभ हैं।" समालोचनात्मक विवेचना कीजिए।

मॉडल उत्तर

परिचय

मौलिक अधिकार व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं, जबकि DPSPs सामाजिक एवं आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए राज्य को नीति संबंधी दिशा प्रदान करते हैं।

विश्लेषण

  • दोनों संविधान के मूल उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं।
  • व्यक्तिगत अधिकार एवं सामाजिक कल्याण में संतुलन।
  • मिनर्वा मिल्स (1980) का महत्व।
  • संवैधानिक नैतिकता को सुदृढ़ बनाते हैं।
  • कल्याणकारी लोकतंत्र की स्थापना में सहायक।

निष्कर्ष

मौलिक अधिकार एवं DPSPs मिलकर एक न्यायपूर्ण, समतामूलक एवं लोकतांत्रिक समाज के निर्माण का आधार प्रस्तुत करते हैं।

प्रश्न 3 (15 अंक)

भारतीय संविधान में राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के समाजवादी, गांधीवादी तथा उदारवादी सिद्धांतों का विश्लेषण कीजिए।

प्रश्न 4 (10 अंक)

अनुच्छेद 39A (समान न्याय एवं निःशुल्क विधिक सहायता) का सामाजिक न्याय की स्थापना में महत्व स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 5 (15 अंक)

समान नागरिक संहिता (अनुच्छेद 44) पर विभिन्न दृष्टिकोणों का विश्लेषण कीजिए।

प्रश्न 6 (15 अंक)

पर्यावरण संरक्षण (अनुच्छेद 48A) एवं सतत विकास के संदर्भ में DPSPs की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

प्रश्न 7 (10 अंक)

भारतीय संविधान में ग्राम पंचायतों (अनुच्छेद 40) के महत्व की व्याख्या कीजिए।

प्रश्न 8 (15 अंक)

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के संदर्भ में DPSPs की समकालीन प्रासंगिकता का विश्लेषण कीजिए।

प्रश्न 9 (10 अंक)

मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) निर्णय का राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के संदर्भ में महत्व स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न 10 (15 अंक)

भारत को एक समावेशी एवं कल्याणकारी राज्य बनाने में राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों की भूमिका का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।

निबंध अभ्यास

निबंध 1

"राज्य के नीति-निर्देशक तत्व : भारतीय कल्याणकारी राज्य की आधारशिला"


निबंध 2

"सामाजिक न्याय और संवैधानिक शासन : DPSPs की भूमिका"


निबंध 3

"सतत विकास, सुशासन और राज्य के नीति-निर्देशक तत्व"

UPSC उत्तर लेखन वैल्यू एडिशन

  • भाग IV (अनुच्छेद 36–51) का उल्लेख करें।
  • अनुच्छेद 39A, 44, 48A, 50 एवं 51 का संदर्भ दें।
  • मिनर्वा मिल्स (1980), केशवानंद भारती (1973) तथा उन्नीकृष्णन (1993) मामलों का उल्लेख करें।
  • उत्तरों में SDGs, हरित विकास, डिजिटल समावेशन एवं कल्याणकारी राज्य की अवधारणा जोड़ें।
  • समापन "संतुलित विकास" एवं "संवैधानिक मूल्यों" के साथ करें।

आज की उत्तर लेखन चुनौती

प्रश्न 2, 6 एवं 10 के उत्तर 45 मिनट में लिखिए। उत्तरों में संबंधित अनुच्छेद, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय, समकालीन सरकारी योजनाएँ तथा संतुलित निष्कर्ष अवश्य शामिल करें।

भाग 4 – UPSC प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) MCQs

GS Paper II | भारतीय संविधान | राज्य के नीति-निर्देशक तत्व | UPSC | राज्य लोक सेवा आयोग

MCQ 1

राज्य के नीति-निर्देशक तत्व भारतीय संविधान के किस भाग में वर्णित हैं?

  1. भाग III
  2. भाग IV
  3. भाग IVA
  4. भाग V

उत्तर: B) भाग IV

MCQ 2

राज्य के नीति-निर्देशक तत्व किन अनुच्छेदों में वर्णित हैं?

  1. अनुच्छेद 12–35
  2. अनुच्छेद 36–51
  3. अनुच्छेद 51A
  4. अनुच्छेद 52–78

उत्तर: B) अनुच्छेद 36–51

MCQ 3

राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों की प्रेरणा किस देश के संविधान से ली गई है?

  1. संयुक्त राज्य अमेरिका
  2. ब्रिटेन
  3. आयरलैंड
  4. कनाडा

उत्तर: C) आयरलैंड

MCQ 4

राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों की प्रकृति क्या है?

  1. न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय
  2. केवल राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी
  3. न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं
  4. केवल संसद के लिए लागू

उत्तर: C) न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं

MCQ 5

समान न्याय एवं निःशुल्क विधिक सहायता किस अनुच्छेद में वर्णित है?

  1. अनुच्छेद 38
  2. अनुच्छेद 39
  3. अनुच्छेद 39A
  4. अनुच्छेद 40

उत्तर: C) अनुच्छेद 39A

MCQ 6

समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) किस अनुच्छेद में वर्णित है?

  1. अनुच्छेद 40
  2. अनुच्छेद 42
  3. अनुच्छेद 44
  4. अनुच्छेद 48A

उत्तर: C) अनुच्छेद 44

MCQ 7

पर्यावरण एवं वन संरक्षण किस अनुच्छेद में वर्णित है?

  1. अनुच्छेद 45
  2. अनुच्छेद 47
  3. अनुच्छेद 48
  4. अनुच्छेद 48A

उत्तर: D) अनुच्छेद 48A

MCQ 8

कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के पृथक्करण का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?

  1. अनुच्छेद 44
  2. अनुच्छेद 48A
  3. अनुच्छेद 50
  4. अनुच्छेद 51

उत्तर: C) अनुच्छेद 50

MCQ 9

मौलिक अधिकार एवं राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के मध्य संतुलन पर बल किस सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में दिया गया?

  1. मेनका गांधी मामला
  2. मिनर्वा मिल्स मामला
  3. श्रेया सिंघल मामला
  4. पुट्टस्वामी मामला

उत्तर: B) मिनर्वा मिल्स मामला (1980)

MCQ 10

राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. राष्ट्रपति की शक्तियाँ बढ़ाना
  2. कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना
  3. संसद को सर्वोच्च बनाना
  4. न्यायपालिका को नियंत्रित करना

उत्तर: B) कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना

UPSC त्वरित पुनरावृत्ति

  • भाग IV
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  • अनुच्छेद 44 – समान नागरिक संहिता
  • अनुच्छेद 48A – पर्यावरण संरक्षण
  • अनुच्छेद 50 – न्यायपालिका का पृथक्करण
  • अनुच्छेद 51 – अंतरराष्ट्रीय शांति
  • मिनर्वा मिल्स (1980)

30 सेकंड पुनरावृत्ति

भाग IV • अनुच्छेद 36–51 • आयरलैंड • कल्याणकारी राज्य • अनुच्छेद 39A • अनुच्छेद 44 • अनुच्छेद 48A • अनुच्छेद 50 • अनुच्छेद 51 • मिनर्वा मिल्स

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